442>||--জীবনের কিছু কঠিন সত্য--||--(1to 2 )-


442>||--জীবনের কিছু কঠিন সত্য--||--(1to 2 )
1>||--জীবনের কিছু কঠিন সত্য--||
2>||-जिन्देगिकी एक सच--||
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||--জীবনের কিছু কঠিন সত্য--||

জীবনের কিছু কঠিন সত্য,
বিশ্বাস ও অবিশ্বাসে নিহিত।

সঙ্গদোষে,ভুল মানুষকে করে বিশ্বাস,
জীবনে ভোগ হয় অর্ধাংশ দুঃখ।

তদ্রুপ জীবনে অর্বাচীনের মতন,
সঠিক মানুষকে করে অবিশ্বাস,
জীবনে ভুক্ত হয় শেষ অর্ধাংশ দুঃখ ।

আমাদের নিত্য ব্যবহার্য আয়না,
জীবনে বিশেষ শিক্ষা কি দেয় না?
অতি ভঙ্গুর, অতিশয় কমজোর,
সদাই দেখি তারে কিন্তু ভাবিনা
কি অদ্ভুত তার স্বভাব।
সেই আয়না,যে কখনই দেখায় না মিথ্যা,
হয়েও কমজোর সত্য প্রকাশে অটল।

পশুরাও বোঝে কে তারে ভালবাসে,
আমরা বুঝিনা,বুঝেও দেখিনা,
কে ভাল আর কে মন্দ বিচার করিনা।
নিজের অহঙ্কারে সদাই থাকি মত্ত,
একান্ত এই প্রকৃতি তাঁকেও দেই না মাহাত্ম্য।
সর্বদা প্রকৃতিরে করে চলেছি ধ্বংস।
||---anrc----04/05/2018-----------||
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2>||-जिन्देगिकी एक सच--||

हमारे सोच एक मामूली,
बदल सकते हैं हमारे जिन्देगि।

जीबन तो शुख दुख की मिलन खेत्र,
बिश्वास, अविश्वास में निहित प्रतक्ष।

सँगदोषे के कारण,गलत आस्वास,
गलत आदमी को करके बिश्वास,
जिबन होती हैं अर्धांश दुखि और सर्बनाश।

शेष अर्धांश दुख मिलते हैं तब,
अच्छे आदमीको हम अबिश्वास करतें हैं जब,
तथा उपेक्षा करते हैं जब।

एक पशु को इतना ज्ञान होते हैं,
कोन उनसे प्यार करते हैं,
कौन नेहि हैं।
हम लोग तो मनुष्य,
हूँ श्रेष्ठ, अहंकार हैं हमे,मेरा जगत।
परन्तु चुन नेहि पाते,
कौन अच्छे कौन गलत।
हम प्रतिदिन भरते हैं प्रदुषण,
यह प्रकिती और जगत।
हम बोलते हैं ऊचा,
महान मेरा भारत।
परन्तु सोचते नेहीं,
रोजना केया करते हैं गलत।
अगर सोच नेहि हैं अच्छे,
क्यसे होंगे सच्छे।

आर्शी होति हैं कमजोर और भंगुर,
दीखते हैं हम रोजना भर पुर।
आर्शी कभी झूट नेही दिखाति हैं,
हरदम सच दिखानेमें ही मजबूर हैं।
||--anrc-----04/05/2018-----------||
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<--©--●অনাথ●--->
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