472>||--हंसो दोस्तों हंसो--||

472>||--हंसो दोस्तों हंसो--||

कर्मप्रधान विश्वे,
जीव मत्रेयी करना हैं कर्म।
मनुष्य जीव श्रेष्ठ बुद्धि दिप्त,
उनके बिचार सतन्त्र।
मनुष्य ना खाली हाथ आता है,
 नही खाली हाथ जाता है ?
मनुष्य अपना भाग्य लेकर आता है,
और अपना किये कर्म लेकर जाता है।

रोजमर्रा की जिन्दगी में,
हंसना बहुत ही जरूरी है,
समस्याएं तो बहुत  सारी,
सामना करना पड़ता है सभी।
हंसने से शरीर में,
मिलती है इंनर्जी।
हंसो दोस्तों हंसो,
हंसी और गम जिन्देगि का फर्म।
जिन्दगी का मजा तो हंसी में,
जिन्दगी का दुख तो गम में।

हँसता हुआ चेहरा इंसान की शान बढ़ाता है,
हँसता हुआ किया कार्य पहचान बढ़ाता है।
अत हंसो दोस्तों हंसो,
गम में जिंदगी मत गमायो।
<--©--●अनाथ●--->
【--anrc-02/06/2018--】
【=06:29:10am==10L=】
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