479>||-जीबन चलिश्णु-||

479>||-जीबन चलिश्णु-||

चिंतन जरुरी है
पर व्यर्थ की चिंता
चिता के समान होती है।
जीबन चलिश्णु चलते ही रहना हैं।
जीवन चलने का नाम है ।
रास्ते और रिश्ते के बीच
एक अज़ीब सा रिश्ता होता है।
कभी कभी चलते चलते रिश्ते बन जाते है,
कभी कभी उन्ही रिश्तों से रास्ते मिल जाते है ।

ज़िन्दगी में खुशियाँ तो आती ही है,
और ये खुशियाँ चन्दन की तरह होती है।
जिनकी खुशबु हवा के साथ चारो
और फैलती है,
जितनी हवा चलेगी खुशबु उतनी ही फैलेगी ।

   <--©--●अनाथ●--->
【--anrc--01/06/2018--】
【09:07:12==14 L=】
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